अब्दुल्ला क्या हाल है ?
अब तुम सोंच रहे होंगे के मुझे हिंदी लिखना किस तरह आ रहा है ।
खैर ये सब तो होता रहता है। जब आदमी किसी काम में वक़्त लगाए तो क्या नही सीख सकता।
आज में तो पहुंच जाऊंगा मगर रयीस और अरशद का मालूम नहीं।
प्रोग्राम के बाद हम निकल जाएँगे खाने के लिए।
अगर कुछ मीटिंग का एजेंडा बनालिये तो बेकार बातों में नहीं समय बीतेगा।
अछा तो अब में चलता हूँ। कुछ होना तो बोलो।
सलाम अलैकुम
Saturday, April 14, 2007
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